
सारंगढ़–बिलाईगढ़ (छ.ग.)
क्षेत्र में वर्षों से ईमानदारी, पारदर्शिता और सामाजिक विश्वास के साथ व्यापार कर रहे महाजनों के खिलाफ सुनियोजित षड्यंत्र का गंभीर मामला सामने आया है। लिखित आवेदनों और दस्तावेज़ी चित्रों से यह स्पष्ट होता है कि मनोज कुमार देवांगन द्वारा निजी आर्थिक संकट से उबरने के उद्देश्य से निर्दोष व्यापारियों को बदनाम करने की साजिश रची गई।
प्राप्त दस्तावेज़ों के अनुसार, गांव-गांव और शहरों में महाजनों के नाम, फोटो और मोबाइल नंबर के साथ भ्रामक पोस्टर लगाए गए। इन पोस्टरों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, विशेषकर व्हाट्सएप स्टेटस के माध्यम से वायरल किया गया, जिससे समाज में उनकी छवि को गंभीर क्षति पहुंची। महाजनों का कहना है कि यह कृत्य न केवल सामाजिक अपराध है, बल्कि व्यापारिक साख को नष्ट करने की सोची-समझी कोशिश भी है।
आवेदनों में यह भी उल्लेख है कि मनोज कुमार देवांगन द्वारा कथित धार्मिक गतिविधियों और बीमारी का सहारा लेकर समाज से सहानुभूति बटोरने का प्रयास किया गया, जबकि उसी आड़ में व्यापारियों को गली-गली बदनाम किया गया। दस्तावेज़ी साक्ष्यों में साफ दर्शाया गया है कि किस प्रकार पूजा-पाठ, तांत्रिक क्रियाओं और धार्मिक भावनाओं का दुरुपयोग कर आर्थिक लाभ लेने और दबाव बनाने की कोशिश की गई।
महाजनों ने एक स्वर में कहा है कि वे कानून में विश्वास रखते हैं। उनका स्पष्ट कहना है कि यदि कोई पक्ष स्वयं को सही मानता है, तो उसे थाना, अदालत और न्यायालय का रास्ता अपनाना चाहिए, न कि गांव-गांव जाकर पोस्टरबाजी, अनर्गल प्रचार और सामाजिक बदनामी का सहारा लेना चाहिए।
महाजनों ने दो टूक शब्दों में कहा—
“हम कानून के दायरे में रहकर लड़ेंगे। हम मनोज कुमार देवांगन जैसे कृत्य नहीं करेंगे, न ही समाज में जाकर अनर्गल कार्य करेंगे।”
महाजनों का कहना है कि वे वर्षों से कपड़ा व्यापार जैसे प्रतिष्ठित व्यवसाय से जुड़े हैं, जिससे सैकड़ों परिवारों की रोजी-रोटी जुड़ी हुई है। झूठे आरोप, फोटो और नाम सार्वजनिक करने से न केवल व्यापार प्रभावित हुआ, बल्कि समाज में उनकी वर्षों की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है। यह सीधा-सीधा मानसिक, सामाजिक और आर्थिक प्रताड़ना का मामला है।
दस्तावेज़ यह भी संकेत देते हैं कि एकतरफा कहानी गढ़कर स्वयं को पीड़ित दिखाने का प्रयास किया गया, जबकि वास्तविक पीड़ा उन व्यापारियों की है जिनकी छवि को जानबूझकर नुकसान पहुंचाया गया। इसे महाजन समुदाय ब्लैकमेलिंग और दबाव बनाने की साजिश मान रहा है।
महाजनों ने संबंधित थाने में लिखित आवेदन देकर मनोज कुमार देवांगन के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है और अब मानहानि का दावा (Defamation Case) दायर करने की भी तैयारी कर ली गई है। व्यापारिक संगठनों ने भी स्पष्ट किया है कि बिना जांच और बिना न्यायिक आदेश किसी की तस्वीर, नाम और मोबाइल नंबर सार्वजनिक करना कानूनन अपराध है।
अब यह मामला प्रशासन और कानून व्यवस्था की निष्पक्षता की कसौटी बन गया है। देखना यह होगा कि दस्तावेज़ी साक्ष्यों के आधार पर दोषियों पर सख्त कार्रवाई होती है या फिर ईमानदार व्यापारियों को यूं ही बदनाम होने दिया जाता है।
महाजनों का विश्वास है कि सत्य और कानून की जीत निश्चित है।


















