
कोरबा/पाली।
ग्रामीण अंचलों की बेटियां आज किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। कठिन परिस्थितियों, सीमित संसाधनों और आर्थिक तंगी के बावजूद वे अपने मजबूत इरादों, कठोर परिश्रम और आत्मविश्वास के बल पर सफलता की नई इबारत लिख रही हैं। ऐसा ही एक प्रेरणादायक उदाहरण कोरबा जिले के पाली विकासखंड अंतर्गत छोटे से गांव दादर से सामने आया है, जहां एक गरीब किसान की बेटी ने सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) में चयनित होकर न सिर्फ अपने परिवार, बल्कि पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है।
पाली विकासखंड अंतर्गत ग्राम लाफा के आश्रित ग्राम दादर निवासी छोटे कृषक सुखीदास एवं गृहिणी रामबाई की पुत्री प्रभा महंत ने यह उपलब्धि हासिल कर यह साबित कर दिया कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो, तो कोई भी बाधा सफलता की राह नहीं रोक सकती। प्रभा अपने माता-पिता की तीसरी संतान हैं। पिता सुखीदास किसानी के साथ-साथ मिस्त्री का कार्य कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। सीमित आय और रोजमर्रा की चुनौतियों के बीच प्रभा ने बचपन से ही संघर्ष को बहुत करीब से देखा, लेकिन कभी हालातों के आगे घुटने नहीं टेके।
22 वर्षीय प्रभा महंत पढ़ाई में शुरू से ही मेधावी रही हैं। इसके साथ-साथ वे खेलकूद और शारीरिक गतिविधियों में भी सक्रिय रहती थीं। बीएसएफ में जाने का सपना उन्होंने बहुत पहले देख लिया था और उसी लक्ष्य को सामने रखकर लगातार मेहनत करती रहीं। कठिन प्रशिक्षण, शारीरिक परीक्षा और मानसिक चुनौतियों के दौर से गुजरते हुए प्रभा ने अपने दृढ़ संकल्प से हर परीक्षा में सफलता पाई। पश्चिम बंगाल में बीएसएफ का कठोर प्रशिक्षण पूरा करने के बाद जब प्रभा अपने गांव लौटीं, तो पूरे दादर गांव में खुशी की लहर दौड़ गई।
ग्रामीणों ने ढोल-नगाड़ों के साथ प्रभा का स्वागत किया, मिठाइयां बांटी गईं और हर जुबान पर उसी का नाम था। लोगों ने इसे सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे पाली क्षेत्र की जीत बताया। प्रभा की सफलता पर गांव के बुजुर्गों से लेकर युवा वर्ग तक सभी गर्व महसूस कर रहे हैं।
अपनी सफलता पर प्रभा महंत ने कहा कि यह उपलब्धि उनके माता-पिता के आशीर्वाद, उनके निरंतर सहयोग और खुद की कड़ी मेहनत का परिणाम है। उन्होंने कहा कि गरीबी जरूर थी, लेकिन सपनों को कभी गरीब नहीं होने दिया। विपरीत परिस्थितियों में भी उन्होंने हार नहीं मानी और आज उसी संघर्ष का फल मिला है। पिता सुखीदास ने भावुक होते हुए कहा कि उन्हें हमेशा विश्वास था कि उनकी बेटी एक दिन जरूर कुछ बड़ा करेगी और आज वह सपना सच हो गया।
प्रभा की यह सफलता उन हजारों युवाओं और छात्राओं के लिए प्रेरणास्रोत है, जो आर्थिक तंगी के कारण अपने सपनों को अधूरा छोड़ने का मन बना लेते हैं। प्रभा ने यह साबित कर दिया कि संसाधनों की कमी सफलता में बाधा नहीं बन सकती, यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो। आज प्रभा महंत न सिर्फ दादर गांव, बल्कि पूरे पाली और कोरबा जिले के लिए गर्व की प्रतीक बन चुकी हैं।




















