
बालोद, 26 दिसम्बर 2025/
जिले में जल संरक्षण, टिकाऊ कृषि और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा के नेतृत्व में किए जा रहे सतत प्रयास अब जमीनी स्तर पर सकारात्मक परिणाम देने लगे हैं। गुरूर विकासखण्ड का ग्राम अरकार ग्रीष्मकालीन धान के स्थान पर दलहनी-तिलहनी एवं अन्य वैकल्पिक फसलों को अपनाकर जिले के लिए एक प्रेरणादायक मॉडल गांव के रूप में उभर रहा है।
उप संचालक कृषि ने बताया कि ग्राम अरकार का कुल भौगोलिक क्षेत्रफल 918.71 हेक्टेयर है, जिसमें से लगभग 698.38 हेक्टेयर कृषि भूमि है। बीते लगभग 50 वर्षों से इस क्षेत्र में ग्रीष्मकालीन धान की खेती की जा रही थी, जिससे भूमिगत जल का अत्यधिक दोहन हुआ और क्षेत्र क्रिटिकल जोन में आ गया। ग्रीष्मकाल में पेयजल संकट की गंभीर स्थिति को देखते हुए कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन एवं कृषि विभाग द्वारा फसल चक्र परिवर्तन की दिशा में ठोस पहल की गई।
वर्ष 2024 में जहां किसानों ने केवल 25 हेक्टेयर में वैकल्पिक फसलें ली थीं, वहीं वर्ष 2025 में 16 कृषकों द्वारा 60 हेक्टेयर में ग्रीष्मकालीन धान के स्थान पर गेहूं, चना, बटरी, कुसुम, सरसों, धनिया एवं साग-सब्जी जैसी फसलों की खेती की जा रही है। इस प्रकार एक ही वर्ष में 35 हेक्टेयर की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जो किसानों में बढ़ती जागरूकता और प्रशासनिक प्रयासों की सफलता को दर्शाती है।
कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा के निर्देश पर ग्राम अरकार में कृषक चौपालों का आयोजन कर किसानों को जल संरक्षण, जन भागीदारी और फसल विविधीकरण के लाभों से अवगत कराया गया। कृषि विभाग द्वारा किसानों को बीज वितरण कर शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित किया जा रहा है, जिससे किसानों का भरोसा वैकल्पिक खेती की ओर बढ़ा है।
दलहनी-तिलहनी फसलों की खरीदी के लिए भारत सरकार की प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा) अंतर्गत प्राइस सपोर्ट स्कीम (पीएसएस) के तहत जिले में 18 उपार्जन केंद्रों का चयन किया गया है, जहां किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अपनी उपज का विक्रय कर सकते हैं।
उल्लेखनीय है कि कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा की दूरदर्शी सोच, सशक्त प्रशासनिक नेतृत्व और किसानों के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण के कारण ग्राम अरकार आज जल संरक्षण और टिकाऊ कृषि की दिशा में एक सफल उदाहरण बन रहा है। यह पहल न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक है, बल्कि आने वाले समय में जिले को जल संकट से उबारने में भी मील का पत्थर साबित होगी।




















