
सर्दियों के मौसम में सरसों का साग और मक्के की रोटी का नाम आते ही घर-घर में पारंपरिक स्वाद और सेहत की खुशबू फैल जाती है। सदियों से हमारी नानी-दादी इस पौष्टिक व्यंजन को सर्दियों के भोजन में विशेष स्थान देती आई हैं। स्वाद के साथ-साथ यह देसी कॉम्बिनेशन स्वास्थ्य के लिए भी किसी वरदान से कम नहीं है।
सरसों का साग पोषक तत्वों का खजाना माना जाता है। इसमें विटामिन ए, सी, के और ई के साथ आयरन, कैल्शियम व मैग्नीशियम भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर को अंदर से मजबूत बनाते हैं। साग में मौजूद फाइबर पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है और कब्ज जैसी समस्याओं से राहत दिलाता है। वहीं यह खराब कोलेस्ट्रॉल को कम कर दिल को स्वस्थ बनाए रखने में भी सहायक होता है।
सर्दियों में होने वाली सर्दी-जुकाम और संक्रमण से बचाव के लिए सरसों का साग बेहद लाभकारी है। विटामिन-सी से भरपूर होने के कारण यह इम्युनिटी को मजबूत करता है। इसमें मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट्स शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करते हैं और गंभीर बीमारियों से बचाव में सहायक हो सकते हैं। साथ ही विटामिन-के और कैल्शियम हड्डियों को मजबूत बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।
सरसों का साग बनाने के लिए सरसों, पालक और बथुआ के पत्तों को उबालकर मथानी से घोटा जाता है, फिर घी में लहसुन, अदरक और मसालों का तड़का लगाकर पकाया जाता है। धीमी आंच पर पकाया गया यह साग स्वाद और पोषण दोनों में लाजवाब होता है।
जब इसे गरमागरम मक्के की रोटी और सफेद मक्खन के साथ परोसा जाता है, तो यह भोजन न केवल पेट भरता है बल्कि तन-मन को भी सुकून देता है। सच ही कहा गया है कि देसी खाना ही असली सुपरफूड है।




















