
सारंगढ़–बिलाईगढ़, 18 दिसंबर 2025/
जिले में सुशासन केवल आदेशों तक सीमित नहीं, बल्कि संवेदनाओं से जुड़ा हुआ दिखाई दे रहा है। इसका सशक्त उदाहरण कलेक्टर डॉ. संजय कन्नौजे की कार्यशैली में स्पष्ट रूप से नजर आता है। वे न सिर्फ कार्यालयों में बैठकर फाइलें निपटाते हैं, बल्कि गांव-गांव जाकर आमजन की पीड़ा सुनना अपना नैतिक दायित्व मानते हैं। यही कारण है कि आज ग्रामीणों के बीच उनका नाम भरोसे और विश्वास का प्रतीक बन चुका है।
हाल ही में विकासखंड बिलाईगढ़ के ग्राम पंचायत परसपाली में आयोजित रात्रिकालीन जन चौपाल में कलेक्टर डॉ. संजय कन्नौजे का मानवीय और संवेदनशील स्वरूप देखने को मिला। बरगद के पेड़ के नीचे खाट पर बैठकर उन्होंने ग्रामीणों से सीधा संवाद किया। बिना किसी औपचारिकता के उन्होंने बुजुर्गों, महिलाओं, किसानों और युवाओं की समस्याएं ध्यानपूर्वक सुनीं। उनकी आंखों में केवल आंकड़े नहीं, बल्कि लोगों की वास्तविक तकलीफें दिखाई दे रही थीं।
ग्रामीणों ने शिक्षा, स्वास्थ्य, राशन वितरण, आवास, पेयजल, सड़क, बिजली और कृषि से जुड़ी समस्याएं सामने रखीं। कलेक्टर ने न केवल उन्हें गंभीरता से सुना, बल्कि कई मामलों में मौके पर ही अधिकारियों को समाधान के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि शासन की योजनाओं का उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब अंतिम व्यक्ति तक उसका लाभ पहुंचे। किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार्य नहीं होगी।
धान खरीदी व्यवस्था पर बोलते हुए कलेक्टर ने किसानों को आश्वस्त किया कि उनकी मेहनत का पूरा मूल्य उन्हें समय पर मिलेगा। टोकन कटाई, खरीदी सीमा में बढ़ोतरी और 24 घंटे टोकन सुविधा की जानकारी देकर उन्होंने किसानों की शंकाएं दूर कीं। इस दौरान किसानों के चेहरे पर संतोष साफ नजर आया।
कलेक्टर डॉ. संजय कन्नौजे ने स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति, आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति और स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता पर विशेष ध्यान दिया। एक आंगनबाड़ी केंद्र के किचन शेड के क्षतिग्रस्त होने की जानकारी मिलते ही उन्होंने तत्काल सुधार के निर्देश दिए। यह दर्शाता है कि वे छोटी-से-छोटी समस्या को भी गंभीरता से लेते हैं।
कलेक्टर की सबसे बड़ी विशेषता उनकी संवेदनशीलता है। वे केवल समस्या सुनते नहीं, बल्कि उस दर्द को महसूस करते हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन का असली चेहरा गांव में दिखाई देना चाहिए, तभी जनता का भरोसा मजबूत होगा। यही सोच उन्हें एक अलग और प्रभावी प्रशासक बनाती है।
ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों बाद उन्हें ऐसा कलेक्टर मिला है, जो सचमुच उनकी बात सुनता है और समाधान करता है। उनके इस व्यवहार से लोगों के मन में शासन के प्रति विश्वास और मजबूत हुआ है।
कुल मिलाकर, कलेक्टर डॉ. संजय कन्नौजे का यह जमीनी, मानवीय और कर्मठ नेतृत्व जिले में सकारात्मक बदलाव की नींव रख रहा है। वे न केवल एक अधिकारी हैं, बल्कि ग्रामीणों के सुख-दुख के सच्चे सहभागी बनकर उभरे हैं। यही कारण है कि उनका कार्य आज पूरे जिले में सराहना का विषय बन गया है।




















