
बालोद, 04 दिसंबर 2025।
केंद्र सरकार के अमृत मिशन के अंतर्गत संचालित महत्वाकांक्षी पहल ‘वुमेन फॉर ट्री’ बालोद जिले में पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तिकरण की अनूठी मिसाल बनकर उभर रही है। यह योजना न केवल शहरों को हरा-भरा बनाने की दिशा में कारगर साबित हो रही है, बल्कि महिला स्व-सहायता समूहों को नियमित रोजगार देकर उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर भी बना रही है।
जिले के आठों नगरीय निकायों में अब तक 6,950 पौधों का रोपण किया जा चुका है। विशेष बात यह है कि इन पौधों की देखरेख, सिंचाई, सुरक्षा और संरक्षण की जिम्मेदारी पूरी तरह महिला समूहों को सौंपी गई है। उनकी प्रत्यक्ष भागीदारी के कारण पौधों की जीवितता का प्रतिशत उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है, जिससे अभियान का असर जमीनी स्तर पर साफ़ दिखाई दे रहा है।
योजना के माध्यम से अब तक 66 महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराया गया है। प्रत्येक महिला को मासिक 8,000 रुपये का मानदेय दिया जा रहा है, जिससे उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हो रही है। इसके साथ ही प्रशासन द्वारा उन्हें कार्य सुविधा हेतु साड़ी, जैकेट, जूते और संपूर्ण टूलकिट (फावड़ा, कुदाली, बेलचा, धमेला) भी प्रदान किए गए हैं। कई महिलाओं ने बताया कि इस आय से वे अपने बच्चों की पढ़ाई, घरेलू जरूरतों तथा स्वयं के विकास में सकारात्मक योगदान दे पा रही हैं।
नगर पालिका परिषद बालोद के मुख्य नगर पालिका अधिकारी श्री मोबिन अली ने बताया कि ‘वुमेन फॉर ट्री’ योजना पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक मजबूत कदम है और साथ ही महिलाओं के सामाजिक-आर्थिक उत्थान का प्रभावी माध्यम भी। उन्होंने कहा कि महिला समूहों की भागीदारी से पौधों के संरक्षण में निरंतर वृद्धि दर्ज की गई है और आने वाले समय में इस अभियान को और भी व्यापक किया जाएगा।
जिला प्रशासन ने आगे बताया कि आने वाले महीनों में वृक्षारोपण के दायरे को बढ़ाते हुए अधिक से अधिक महिलाओं को इससे जोड़ने की तैयारी है, जिससे रोजगार के नए अवसर भी विकसित होंगे। साथ ही पौधों की देखभाल के लिए तकनीकी प्रशिक्षण और आवश्यक संसाधन भी उपलब्ध कराए जाएंगे।
प्रशासन ने जिले के सभी नागरिकों, सामाजिक संस्थाओं और पंचायतों से अपील की है कि वे इस अभियान में सक्रिय सहयोग प्रदान करें, ताकि बालोद जिले को हरियाली, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक मॉडल जिले के रूप में स्थापित किया जा सके। इसके साथ ही जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन को लेकर भी जनजागरूकता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।




















