
सारंगढ़-बिलाईगढ़, 19 नवंबर । जिले के प्रभारी सचिव एवं श्रम आयुक्त आईएएस हिमशिखर गुप्ता ने सारंगढ़ ब्लॉक के दानसरा स्थित शासकीय प्राथमिक, माध्यमिक और हाईस्कूल का गहन निरीक्षण किया। शिक्षा की गुणवत्ता, मध्यान्ह भोजन व्यवस्था, छात्रों की सीखने की क्षमता और योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा करते हुए उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया—“शिक्षा में सुधार सर्वोच्च प्राथमिकता है, और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”
निरीक्षण के दौरान उनके साथ कलेक्टर डॉ. संजय कन्नौजे, पुलिस अधीक्षक आन्जनेय वार्ष्णेय, जिला शिक्षा अधिकारी जोईधा राम डहरिया, एसडीएम वर्षा बंसल एवं अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
प्रभारी सचिव सबसे पहले मध्यान्ह भोजन व्यवस्था का जायजा लेने पहुंचे। उन्होंने रसोईघर में जाकर स्वयं खाने की गुणवत्ता देखी और रसोइयों से मेनू के अनुरूप भोजन तैयार करने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि बच्चों को पौष्टिक और स्वच्छ भोजन मिले, क्योंकि पोषण सीधे शिक्षा और स्वास्थ्य पर प्रभाव डालता है।

इसके बाद उन्होंने कक्षाओं में जाकर बच्चों से सीधा संवाद किया। कक्षा 9वीं में उन्होंने पूछा कि कितने बच्चे अंग्रेजी में बोल सकते हैं। किसी के हाथ न उठाने पर उन्होंने शिक्षकों को भाषा दक्षता बढ़ाने पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी। गणित की कक्षा में उन्होंने शिक्षक से गुणा और भाग के प्रश्न दिए और विद्यार्थियों को ब्लैकबोर्ड पर हल करने के लिए कहा। एक बालिका द्वारा सही समाधान प्रस्तुत करने पर उन्होंने उसकी सराहना की और अन्य छात्रों को भी गणित का नियमित अभ्यास करने की प्रेरणा दी।
निरीक्षण के समय उन्होंने सायकल वितरण योजना की प्रगति पर डीईओ से प्रश्न किया। डीईओ ने बताया कि सायकल की सामग्री चार दिन पहले प्राप्त हुई है और पार्ट्स फिटिंग का कार्य जारी है। इस पर सचिव ने निर्देश दिए कि वितरण कार्य को प्राथमिकता में पूरा किया जाए ताकि विद्यार्थी समय पर सायकल का लाभ ले सकें।
कक्षा 10वीं में उन्होंने बच्चों से उनके भविष्य के सपनों के बारे में पूछा। अधिकांश छात्रों ने पुलिस, फौजी और डॉक्टर बनने की इच्छा जताई। प्रभारी सचिव ने उन्हें लक्ष्य स्पष्ट रखने, नियमित पढ़ाई करने और गणित–विज्ञान की मजबूत तैयारी करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि “आप चाहे जो बनना चाहें, मेहनत और लगन ही आपको मंज़िल तक ले जाएगी।”
अंत में उन्होंने जिले के सभी अधिकारियों को निर्देश दिए कि बोर्ड परीक्षाओं में 10वीं और 12वीं के न्यूनतम 90 प्रतिशत परिणाम सुनिश्चित करने के लिए शिक्षण स्तर में सुधार लाया जाए, कमजोर बच्चों को अतिरिक्त सहायता दी जाए और निरंतर मॉनिटरिंग की जाए।
निरीक्षण का यह दौर विद्यार्थियों में उत्साह भरने वाला रहा, जबकि अधिकारियों के लिए स्पष्ट चेतावनी भी—शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार अनिवार्य है, और इसका प्रभाव बच्चों के भविष्य पर सीधे दिखाई देना चाहिए।



















