
रायपुर/बस्तर, 31 अक्टूबर 2025।
कभी नक्सलवाद की छाया में डूबा रहने वाला बस्तर अब विकास की रोशनी से जगमगा रहा है। राज्योत्सव के अवसर पर प्रदर्शित झांकी के मध्य भाग में बस्तर के विकास और परिवर्तन की यात्रा को अत्यंत कलात्मक ढंग से दर्शाया गया, जिसने दर्शकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर लिया। यह झांकी केवल कला का प्रदर्शन नहीं थी, बल्कि बस्तर की नई कहानी, नई सोच और नई उड़ान का प्रतीक बन गई।
झांकी में दिखाया गया कि किस तरह कभी भय और हिंसा से जकड़ा यह क्षेत्र आज शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और रोजगार के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति कर रहा है। आधुनिक विद्यालयों, अस्पतालों और सड़कों के निर्माण ने बस्तर को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा है। जहां कभी बंदूक की आवाज़ें गूंजती थीं, आज वहीं बच्चों की पढ़ाई और किसानों के गीत सुनाई देते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं – जैसे कि प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, जल जीवन मिशन, और डिजिटल इंडिया – ने बस्तर की तस्वीर बदल दी है। वहीं, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में राज्य सरकार ने बस्तर को शिक्षा, पर्यटन और आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने का कार्य किया है।
झांकी में दिखाए गए दृश्यों में आत्मानंद स्कूलों में पढ़ते बच्चे, सड़क निर्माण में जुटे मजदूर, और हस्तशिल्प के माध्यम से आत्मनिर्भर होती महिलाएं – बस्तर की बदलती सोच और संभावनाओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत करते हैं। बस्तर के जनजातीय कलाकारों ने परंपरा और आधुनिकता के संगम को इस प्रकार सजाया कि दर्शक मंत्रमुग्ध रह गए।
आज बस्तर केवल मानचित्र पर एक भौगोलिक क्षेत्र नहीं, बल्कि परिवर्तन की मिसाल बन चुका है। यहां अब बंदूक की नहीं, विकास की गूंज सुनाई देती है। यह नया बस्तर भारत के उस नए युग का प्रतीक है, जहां आशा, विश्वास और आत्मनिर्भरता का सूरज पूरी रौशनी के साथ उदय हो चुका है।




















