
कोरबा/पोड़ी उपरोड़ा। किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में शासन-प्रशासन लगातार प्रयासरत है। इसी कड़ी में राष्ट्रीय खाद्य तिलहन मिशन योजना के तहत कृषि विभाग द्वारा ग्राम पंचायत भवन घोसरा में किसानों के बीच निशुल्क उन्नत मिनी सरसों बीज का वितरण किया गया। इस कार्यक्रम में जिला पंचायत सदस्य विद्वान सिंह मरकाम एवं जनपद सदस्य व सभापति मत्स्य-पशुपालन समिति भारत सिंह सिदार मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में करीब चार दर्जन किसानों को बीज का वितरण किया गया। विभाग द्वारा प्रति एकड़ दो किलोग्राम बीज के मान से यह वितरण किया गया। निशुल्क बीज पाकर किसानों के चेहरों पर संतोष और खुशी साफ झलक रही थी। किसानों ने कहा कि इस पहल से उन्हें खेती की लागत कम करने और उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी।
इस अवसर पर ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी मनीष डिक्सेना ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि शासन की मंशा है कि अधिक से अधिक किसानों को दलहन-तिलहन योजनाओं का लाभ मिले, जिससे इन फसलों का रकबा बढ़े और किसान आर्थिक रूप से सशक्त बनें। उन्होंने बताया कि सरसों जैसी तिलहन फसलें न केवल किसानों की आय बढ़ाती हैं, बल्कि देश की तेल उत्पादकता में भी अहम भूमिका निभाती हैं। देश को खाद्य तेल के आयात पर निर्भरता कम करने के लिए ऐसे प्रयास किए जा रहे हैं।
डिक्सेना ने उपस्थित किसानों को सरकार की विभिन्न कृषि हितैषी योजनाओं — जैसे प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना और प्राकृतिक कृषि प्रोत्साहन जैसी योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे इन योजनाओं का अधिकतम लाभ लें और अपनी खेती को तकनीकी दृष्टि से मजबूत बनाएं।
वहीं, कार्यालयीन शाखा प्रभारी धर्मेंद्र तंवर ने किसानों को वितरित किए गए उन्नत किस्म के सरसों बीज की गुणवत्ता और उसकी पैदावार के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह बीज अधिक उत्पादन क्षमता वाला है, जो स्थानीय मिट्टी और जलवायु के अनुरूप तैयार किया गया है। तंवर ने बीज बोआई की प्रक्रिया, सिंचाई, खाद एवं कीट प्रबंधन के वैज्ञानिक तरीकों पर भी विस्तार से जानकारी दी ताकि किसान अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकें।
जिला पंचायत सदस्य विद्वान सिंह मरकाम ने कहा कि कृषि विभाग द्वारा किए जा रहे बीज वितरण कार्य पूर्णतः पारदर्शी तरीके से हो रहा है। पात्र किसानों को प्राथमिकता दी जा रही है ताकि कोई भी जरूरतमंद किसान वंचित न रहे। उन्होंने कहा कि शासन का लक्ष्य है कि क्षेत्र के हर पात्र किसान तक योजनाओं का लाभ पहुंचाया जाए और कृषि को आत्मनिर्भरता का आधार बनाया जाए।
उन्होंने आगे कहा कि किसान देश की रीढ़ हैं, और उनके सशक्त होने से ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। इसलिए शासन द्वारा शुरू की गई हर योजना का उद्देश्य किसान के जीवन स्तर को ऊँचा उठाना है।
कार्यक्रम के अंत में पंचायत प्रतिनिधियों, कृषि विभाग के कर्मचारियों और ग्रामीणों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई। उपस्थित किसानों ने कृषि विभाग की इस पहल की सराहना की और सरसों की खेती को बड़े पैमाने पर अपनाने का संकल्प लिया।
यह कार्यक्रम न केवल बीज वितरण तक सीमित रहा, बल्कि किसानों में आत्मनिर्भर खेती की भावना जागृत करने का माध्यम भी बना। इस तरह शासन की यह पहल किसानों के खेतों में सुनहरे भविष्य की नई फसल बोने की दिशा में एक सशक्त कदम साबित हो रही है।




















