
कोरबा/पाली-पोड़ी उपरोड़ा। जनपद पंचायत पोड़ी-उपरोड़ा के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत पोड़ी में वर्षों पुराने गबन के मामले का बड़ा खुलासा हुआ है। जिला पंचायत सीईओ ने जांच रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन पंचायत सचिव मोहन कौशिक और पूर्व सरपंच के विरुद्ध 16 लाख 49 हजार 688 रुपये की वसूली के आदेश जारी किए हैं। यह राशि वर्ष 2011-12 से 2014-15 के बीच विकास कार्यों के नाम पर निकाली गई थी, जिसमें भारी अनियमितता पाई गई।
स्थानांतरण और विरोध के बीच उठा मामला
पंचायत सचिव मोहन कौशिक लंबे समय से तानाखार पंचायत में पदस्थ थे, लेकिन वे पंचायत मुख्यालय में नियमित रूप से उपस्थित नहीं रहते थे। वे 65 किलोमीटर दूर कथरीमाल से आना-जाना करते थे, जिससे पंचायत के कार्य प्रभावित हो रहे थे। ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने कई बार उन्हें पंचायत में ही रहने की अपील की, लेकिन उन्होंने इसे अनसुना कर दिया।
स्थिति से परेशान पंचायत प्रतिनिधियों ने जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. पवन सिंह के नेतृत्व में कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। जांच के बाद जिला पंचायत सीईओ दिनेश नाग ने सचिव मोहन कौशिक का स्थानांतरण तानाखार से दम्हामुड़ा कर दिया।
सचिव संघ ने दिया हड़ताल का अल्टीमेटम
मोहन कौशिक का स्थानांतरण होते ही सचिव संघ उनके समर्थन में उतर आया और जिला पंचायत सीईओ को ज्ञापन सौंपकर स्थानांतरण रोकने की मांग की। यहां तक कि संघ ने कलमबंद हड़ताल की धमकी दी। हालांकि, सीईओ की जांच में मोहन कौशिक के खिलाफ लगाए गए आरोप सही साबित हुए। जांच में यह भी पाया गया कि वे पंचायत से अधिकांश समय गायब रहते थे और जिम्मेदारियों का निर्वहन नहीं कर रहे थे।
जांच में गबन का मामला उजागर
जिला पंचायत की जांच रिपोर्ट के अनुसार, ग्राम पंचायत पोड़ी में वर्ष 2011-12 से 2014-15 तक 34 लाख 61 हजार 972 रुपये की राशि विभिन्न विकास कार्यों के लिए स्वीकृत हुई थी। इस दौरान 18 लाख 12 हजार 284 रुपये का व्यय नियमित पाया गया, जबकि शेष 16 लाख 49 हजार 688 रुपये की राशि में अनियमित आहरण व गबन की पुष्टि हुई।
इसी के आधार पर जिला पंचायत सीईओ ने तत्कालीन सचिव मोहन कौशिक और तत्कालीन सरपंच से पूरी राशि की रिकवरी के आदेश जारी किए हैं। साथ ही संबंधित अधिकारियों को शासन को हुई क्षति की भरपाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
भाजपा मंडल अध्यक्ष चतुर् भुवन नायक का बयान
इस पूरे मामले पर भाजपा मंडल अध्यक्ष एवं पौड़ी उपरोड़ा जनपदसभापति चतुर्भुवन नायक ने कहा, “गांव और विकास के नाम पर गबन करने वाले ऐसे भ्रष्ट सचिव और सरपंच पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। जनता की गाढ़ी कमाई से जो धन पंचायत में विकास के लिए आता है, उसका दुरुपयोग किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। हम प्रशासन से मांग करते हैं कि दोषियों को सख्त सजा मिले।”
उन्होंने इस कार्रवाई के लिए जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. पवन सिंह और जिला सीईओ दिनेश नाग का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने दबाव में आए बिना जांच करवाई और रिकवरी की दिशा में ठोस कदम उठाया है।
आगे की कार्रवाई
जिला पंचायत द्वारा अब सचिव और पूर्व सरपंच से 16.50 लाख रुपये की वसूली की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। साथ ही प्रशासनिक स्तर पर आगे और भी कार्रवाई संभव है। इस मामले से अन्य पंचायत सचिवों में भी हड़कंप मच गया है। प्रशासन का कहना है कि पंचायतों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सख्त कदम जारी रहेंगे।




















