
कोरबा/पोंडी-उपरोड़ा।
ग्राम पंचायत तानाखार में सचिव मोहनचंद कौशिक के खिलाफ सरपंच और उप सरपंच समेत पंचों ने मोर्चा खोल दिया है। पंचायत सचिव पर गंभीर आरोप लगाते हुए प्रतिनिधियों ने एसडीएम पोंडी-उपरोड़ा को पत्र सौंपकर उन्हें तत्काल स्थानांतरित करने की मांग की है। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यदि सात दिनों के भीतर प्रशासन द्वारा कार्रवाई नहीं की गई तो वे जनपद पंचायत कार्यालय का घेराव करेंगे।
ग्राम पंचायत तानाखार की सरपंच श्रीमती तीजबाई बिंझवार और उप सरपंच भुवनेश्वर प्रसाद द्वारा अधोहस्ताक्षरित पत्र में स्पष्ट लिखा गया है कि पंचायत सचिव मोहनचंद कौशिक अपने दायित्वों का निर्वहन सही ढंग से नहीं कर रहे हैं। उनके खिलाफ ग्रामीणों और प्रतिनिधियों की पूर्व में भी कई शिकायतें दर्ज की गई हैं। इन्हीं शिकायतों के आधार पर जनपद पंचायत पोंडी-उपरोड़ा ने दो बार जांच कराई। 04 अक्टूबर 2024 और 25 अगस्त 2025 को गठित जांच समितियों ने गांव में पहुंचकर ग्रामीणों के बयान दर्ज किए।

ग्रामीणों का आरोप है कि सचिव पंचायत में उपस्थित नहीं रहते और पंचायत के विकास कार्य ठप पड़े रहते हैं। यही नहीं, ग्रामीणों की छोटी-छोटी समस्याओं का भी समय पर निराकरण नहीं होता। जांच दिवस पर भी सचिव अनुपस्थित पाए गए, जबकि ग्रामवासियों ने उनके खिलाफ बयान दिया। इसके बावजूद सचिव का अब तक स्थानांतरण नहीं हुआ है। यही वजह है कि अब सरपंच और उप सरपंच ने मिलकर सीधे एसडीएम को पत्र लिखकर कठोर कदम उठाने की मांग की है।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि यदि सात दिनों के भीतर सचिव का स्थानांतरण सुनिश्चित नहीं किया गया तो ग्राम पंचायत के प्रतिनिधि और ग्रामीणजन मजबूरन जनपद पंचायत कार्यालय, पोंडी-उपरोड़ा का घेराव करेंगे। इस संभावित आंदोलन की पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
सरपंच का बढ़ता दबदबा
गौरतलब है कि ग्राम पंचायत तानाखार की सरपंच तीजबाई बिंझवार का पिछले पंचवर्षीय कार्यकाल बेहद सक्रिय और सराहनीय रहा है। उन्होंने पंचायत क्षेत्र में स्वच्छता, पेयजल, महिला स्व-सहायता समूहों की मजबूती और कई विकास कार्यों को प्राथमिकता दी। ग्रामीणों के बीच उनकी लोकप्रियता और स्वीकार्यता का यही कारण है कि आज पूरा गांव उनके साथ खड़ा है। ग्रामीणों का कहना है कि सरपंच हमेशा उनकी समस्याओं को सुनती हैं और निडर होकर उच्च अधिकारियों तक आवाज़ पहुंचाती हैं।
सचिव पर गंभीर सवाल

वहीं, पंचायत सचिव मोहनचंद कौशिक पर लगातार सवाल उठते रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सचिव के कारण योजनाओं का लाभ समय पर नहीं मिल पाता। कई बार शिकायतों के बाद भी जब कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो अब प्रतिनिधियों को आंदोलन की चेतावनी तक देनी पड़ी है।
प्रशासन के सामने चुनौती
यह पूरा मामला अब जिला प्रशासन की गंभीर परीक्षा बन गया है। एक ओर सरपंच और ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ रहा है, तो दूसरी ओर सचिव को बचाने की कोशिशों के आरोप भी लग रहे हैं। अब देखना होगा कि एसडीएम पोंडी-उपरोड़ा और कलेक्टर कोरबा इस विवाद को कैसे सुलझाते हैं और ग्रामीणों की मांग पर कितनी जल्दी अमल होता है।




















