
रोजाना जटगा के जंगलों से हो रही पेड़ों की अवैध कटाई वन विभाग के अधिकारियों को जानकारी होने के उपरांत भी अनजान बने हुए हैं……

कोरबा से अशोक दीवान की खास रिपोर्ट
कोरबा:-कटघोरा वनमंडल के अनेक कस्बे और आसपास के जंगलों में रोजाना तेजी के साथ जंगलों की कटाई की जा रही है। जिससे जंगल में हरे-भरे पौधों की संख्या में लगातार कमी आ रही है। पेड़ों की कटाई के कारण वन परिक्षेत्र कम होता जा रहा है। 15 साल पहले जंगल काफी हरे-भरे हुआ करते थे, लेकिन इसमें आज कमी आ चुकी है। बीते दिनों भी राजस्व की जमीन पर अतिक्रमणकारियों द्वारा पेड़ काटने का मामला सामने आया था। तब एसडीएम ने लकड़ी माफिया के खिलाफ कार्रवाई करने के आदेश दिए थे। बावजूद इसके जंगल की कटाई पर वन विभाग रोक लगाने में असमर्थ दिखाई दे रहा है।

कटघोरा वन मंडल के जटगा रेंज एवं अन्य रेंज में भी खैर, सौगौन,साजा, साराइ सहित अन्य पेड़ों की कटाई लगातार की जा रही है। बेरोक-टोक कटाई के चलते लकड़ी माफिया जंगलों में लगातार सक्रिय बने हुए हैं। पेड़ों के अलावा वन क्षेत्र में पत्थर उत्खनन का काम भी किया जा रहा है। बता दें कि सामान्य वन मंडल के जटगा वन परिक्षेत्र के अंतर्गत बांधापारा पश्चिम रेंज में खैर के पेड़बड़ी मात्रा में पाए जाते हैं। खैर की लकड़ी की कत्था ,पान मसाला मटेरियल एवं टेबल, फर्निचर के लिए मांग के चलते लकड़ी माफिया कटाई की ताक में रहता है। स्थानीय ग्रामीणों की मानें तो वन विभाग के संरक्षण में लकड़ी माफिया पनप रहा है। पिछले कई दिन से जंगल में पेड़ों की कटाई चल रही है।

राजग्वालिन के जंगल में माफियाओं ने काट दिया पेड़।
पौधरोपरण के लिए हर साल किए जाते हैं लाखों रु. खर्च
जटगा, कटघोरा, केंदइ और एतमानगर क्षेत्र के जंगलों में पौधरोपण के लिए वन विभाग अधिकारियों को टारगेट दिया जाता है। वहीं अधिकारी पौधारोपण में लाखों रुपए खर्च कर पौधे रोपे जाते हैं, लेकिन उनकी देखरेख और सुरक्षा को लेकर ध्यान नहीं दिया जाता है। इसके अलावा जंगलों में खड़े पेड़ों की देखरेख वन विभाग द्वारा की जाए तो जंगल को काफी हद तक बचाया जा सकता है।
मोबाइल पर काल के माध्यम से
पेड़ों की लगातार कटाई के मामले में जब वन रेंजर गजेंद्र दोहरे से बात करने के लिए उनके मोबाइल नंबर 9479182095 पर कई कॉल किए लेकिन किसी का भी काल उठाना उचित नहीं समझते।और मामले की जानकारी उच्च अधिकारी DFO को दी जाने पर DFO कुमार निशांत का कहना था कि वन रक्षक सक्षम अधिकारी हैं कार्यवाही करने के लिए जिसमें जपती,एवं p.u.r. और पंचनामा की कार्यवाही करने के बाद डिप्टी रेंजर को सौप देने के बाद डिप्टी रेंजर उसको मुहैया करेंगे और मुहैया करने के बाद मामले की सूचना उच्च अधिकारी को सौंप कर रात सात की कार्यवाही करेंगे कहकर जानकारी दिया गया था!जबकि ऐसा देखने को मिला ही नहीं इसमे जटगा रेंजर गजेंद्र दोहरे ने मामले को आगे ना बढ़ाकर मामले में गाड़ी मालिक एवं लकड़ी माफिया दोनों से मोटी रकम लेकर मामले को दबा दिया गया!और इस मामले के बारे में पूछने पर हमें इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है वन अधिकारियों का ऐसा कहना है!
वन क्षेत्र में नहीं थम रहा अवैध उत्खनन,
वन क्षेत्र से पत्थर, व रेत का अवैध उत्खनन एवं परिवहन किया जा रहा है। पिछले एक माह से , जटगा क्षेत्र में जंगल में बिना परमिशन से चल रही खदानों से पत्थर एवं रेत अवैध रूप से निकाले जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अवैध उत्खनन की शिकायत के बाद भी विभागीय स्तर पर खनन माफिया के विरुद्ध कार्रवाई नहीं की जाती है। जिससे माफिया लगातार सक्रिय बने हुए हैं।
विस्तृत रूप से लाखों हेक्टेयर में फैला है जंगल
जटगा के लोग जंगल में धड़ल्ले से पेड़ काट रहे हैं। करीब विस्तृत रूप से लाखों हेक्टेयर में फैली इस रेंज में लकड़ी काटने वालों को वन विभाग की कार्रवाई का डर नहीं रहता है। ऐसे में जंगल में पेड़ों के ठूंठ ही दिखाई दे रहे हैं। स्थानीय आदिवासियों का कहना है कि पेड़ कटने की शिकायतें करने पर जिम्मेदार अधिकारी से कई बार की जा चुकी हैं। लेकिन इसके बाद भी अधिकारी इस ओर कोई ध्यान नहीं देते हैं। जिससे वन माफिया के साथ रेंज के अधिकारी-कर्मचारियों की मिलीभगत की आशंका वनवासी समुदाय के लोगों ने जताई है।
अब देखना यह होगा कि समाचार के माध्यम से प्रसारित होने के बाद वन विभाग के उच्च अधिकारी DFO कुमार निशांत एवं SDO संजय त्रिपाठी के द्वारा मामले की जांच करने के उपरांत जटगा रेंजर, डिप्टी रेंजर एवं वन रक्षक के ऊपर गाज गिरती है या उनको संरक्षण मिलती है!




















